बीना विकासखंड में फसल विविधीकरण और कृषि नवाचार के माध्यम से खेती का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। किसान अब परंपरागत फसलों के साथ चिया सीड्स, तिल, ज्वार, रोज़ेल (हिबिस्कस) तथा चिरायता जैसी औषधीय एवं नकदी फसलों की खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं।

कृषि विभाग के सतत मार्गदर्शन से किसानों को नई तकनीकों और आधुनिक खेती के तरीके अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है, जिससे उनकी आय बढ़ाने के नए अवसर तैयार हो रहे हैं। कृषि विभाग के वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी अवदेश राय लगातार गांवों और खेतों का भ्रमण कर किसानों से संवाद स्थापित कर रहे हैं।

वे किसानों को वैज्ञानिक खेती, नवाचार फसलों तथा आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी देने के साथ सफल प्रयोगों और अनुभवों का आदान-प्रदान भी करा रहे हैं, ताकि अधिक से अधिक किसान इन नवाचारों का लाभ उठा सकें। क्षेत्र के कुछ किसानों ने चिया सीड्स की बुवाई छिड़काव विधि से शुरू कर दी है, जबकि कई किसान मशीन एवं बेड पद्धति से बुवाई करने की तैयारी कर रहे हैं।

किसानों की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए ऐसी बहुउद्देशीय मशीन का डिज़ाइन तैयार किया गया है, जो बेड निर्माण के साथ छोटे और बड़े दोनों प्रकार के बीजों की बुवाई करने में सक्षम होगी। इसके लिए किसानों के दल ने खुरई स्थित विजय इंडस्ट्रीज़ के प्लांट का भ्रमण कर तकनीकी विशेषज्ञों से चर्चा भी की। मशीन निर्माण का कार्य प्रगति पर है और इसके शीघ्र तैयार होने की संभावना है।

मशीन तैयार होने के बाद खेतों में इसका प्रदर्शन किया जाएगा, जिससे किसान आधुनिक एवं वैज्ञानिक तरीके से नवाचार और औषधीय फसलों की बुवाई कर सकेंगे। यह पहल बीना क्षेत्र में फसल विविधीकरण, तकनीकी उन्नयन और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।