सेवा संकल्प अभियान के तहत सीधी जिले में 3 अक्टूबर को आयोजित ‘आंगन मिलन’ कार्यक्रम ने स्कूल और आंगनबाड़ी के बच्चों के बीच शिक्षा, संवाद और अपनत्व की नई मिसाल पेश की। शासन के निर्देशन एवं कलेक्टर विकास मिश्रा के मार्गदर्शन में स्कूल शिक्षा एवं महिला बाल विकास विभाग के संयुक्त प्रयास से जिले के पांचों विकासखंडों में प्राथमिक कक्षाओं के विद्यार्थियों को उनके नजदीकी आंगनबाड़ी केंद्रों का भ्रमण कराया गया। स्कूल से पहुंचे बच्चों ने अपने साथ पुराने लेकिन उपयोगी खिलौने एवं अध्ययन सामग्री लेकर आंगनबाड़ी के 3 से 5 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों से मुलाकात की और उन्हें यह सामग्री उपहार स्वरूप वितरित की।

कार्यक्रम के दौरान स्कूल के बच्चों ने आंगनबाड़ी के नन्हे-मुन्नों के साथ बातचीत की, उनके साथ खेला और अपनी खुशियां साझा कीं। वहीं आंगनबाड़ी के बच्चों को स्कूल में आगे होने वाली पढ़ाई और वहां की गतिविधियों की सहज जानकारी मिली। इस पहल ने आंगनबाड़ी से प्राथमिक विद्यालय तक बच्चों के शिक्षा संक्रमण को सहज बनाने के साथ-साथ बड़े बच्चों में सहयोग, संवेदनशीलता और साझा करने की भावना विकसित करने का अवसर दिया।

खास बातें

  • कार्यक्रम के दौरान स्कूल के बच्चों ने आंगनबाड़ी के नन्हे-मुन्नों के साथ बातचीत की, उनके साथ खेला और अपनी खुशियां साझा कीं।
  • विद्यार्थी अपने घर और विद्यालय से उपयोग में न आने वाले लेकिन उपयोगी खिलौने तथा अध्ययन सामग्री लेकर पहुंचे और स्वयं छोटे बच्चों को वितरित की।
  • कार्यक्रम को सफल बनाने में स्कूल शिक्षा एवं महिला बाल विकास विभाग के मैदानी अमले की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

पांचों विकासखंडों में उत्साह के साथ हुआ आयोजन

जिले के सीधी, मझौली, कुसमी, सिहावल और रामपुर नैकिन विकासखंडों में चयनित शालाओं के विद्यार्थियों ने इस पहल में उत्साहपूर्वक सहभागिता की। सीधी जनपद शिक्षा केंद्र अंतर्गत राधा कृष्ण विद्या मंदिर सीधी और साक्षी विद्यालय बढ़ौरा, मझौली में माध्यमिक शाला अमहिया एवं बालाजी पब्लिक हाई स्कूल, कुसमी में माध्यमिक शाला बड़वाही एवं माध्यमिक शाला ठाढ़ीपाथर, सिहावल में माध्यमिक शाला पैगामा एवं माध्यमिक शाला गेरुआ तथा रामपुर नैकिन में सांदीपनि विद्यालय और गर्ल्स हायर सेकेंडरी स्कूल चुरहट के बच्चों ने नजदीकी आंगनबाड़ी केंद्रों का भ्रमण किया।

बच्चों ने खुद आगे बढ़कर बांटी सामग्री

‘आंगन मिलन’ की सबसे खास बात यह रही कि बच्चों को केवल दर्शक बनाकर नहीं रखा गया, बल्कि उन्हें कार्यक्रम का सक्रिय सहभागी बनाया गया। विद्यार्थी अपने घर और विद्यालय से उपयोग में न आने वाले लेकिन उपयोगी खिलौने तथा अध्ययन सामग्री लेकर पहुंचे और स्वयं छोटे बच्चों को वितरित की। उपहार पाकर आंगनबाड़ी के बच्चों के चेहरों पर आई खुशी ने इस पहल को और खास बना दिया।

आंगनबाड़ी से स्कूल तक का सफर हुआ आसान

आंगनबाड़ी के बच्चों के लिए स्कूल से आए बड़े बच्चों से मिलना उनके भविष्य के विद्यालय जीवन की एक छोटी सी झलक जैसा रहा। उन्होंने देखा कि आंगनबाड़ी के बाद वे भी इसी तरह स्कूल जाएंगे, शिक्षकों से पढ़ेंगे और अपने बड़े साथियों की तरह विभिन्न गतिविधियों में भाग लेंगे। इससे बच्चों के मन में विद्यालय को लेकर उत्सुकता और सकारात्मक भाव विकसित करने में मदद मिली।

वहीं प्राथमिक कक्षा के विद्यार्थियों ने छोटे बच्चों के साथ संवाद करते हुए सहयोग और जिम्मेदारी का अनुभव किया। शिक्षकों ने भी इस अवसर का उपयोग बच्चों को प्रेम, सहभागिता, स्वच्छता, अध्ययन और आपसी सहयोग जैसे मूल्यों से जोड़ने के लिए किया।

कार्यक्रम को सफल बनाने में स्कूल शिक्षा एवं महिला बाल विकास विभाग के मैदानी अमले की महत्वपूर्ण भूमिका रही। जिला परियोजना समन्वयक विनय मिश्रा, सभी विकासखण्डों के बीआरसीसी, शाला प्रमुखों और शिक्षकों ने बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्रों तक पहुंचाने तथा पूरे कार्यक्रम में सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित की।