सही मार्गदर्शन, आधुनिक तकनीक और मेहनत जब एक साथ मिलते हैं, तो बदलाव की एक नई इबारत लिखी जाती है। ऐसी ही प्रेरक 'कहानी बदलाव की' है जनपद पंचायत करैरा के ग्राम पंचायत सहरेया निवासी प्रगतिशील किसान प्रेमलाल प्रजापति की। पारंपरिक खेती से कम उत्पादन और आर्थिक तंगी का सामना कर रहे प्रेमलाल जी के जीवन में कृषि विभाग की सलाह और प्रोत्साहन ने एक नया सवेरा ला दिया है।
पुरानी पद्धतियों के ढर्रे को तोड़कर वैज्ञानिक और जैविक कृषि पद्धतियों को अपनाकर आज वे एक समृद्ध और आत्मनिर्भर किसान के रूप में अपनी पहचान बना चुके हैं। कृषि विभाग की सलाह से बदला खेती का तरीका किसान प्रेमलाल प्रजापति बताते हैं कि एक समय था जब वे पुरानी विधियों से खेती करते थे।
लागत अधिक आती थी, उत्पादन कम होता था और मुनाफा न के बराबर होने से उनकी आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो गई थी। इस कठिन दौर में कृषि विभाग करैरा के अधिकारियों ने उन्हें आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक फसल चक्र अपनाने का सुझाव दिया।
कृषि विभाग के अधिकारियों की सलाह को मानते हुए उन्होंने पुरानी फसल चक्र प्रणाली को छोड़कर कृषि विभाग द्वारा प्रदान किए गए उच्च गुणवत्ता वाले उन्नत किस्म के बीजों का उपयोग कर उन्होंने मूंगफली, उड़द, मूंग, गेहूं के साथ-साथ सब्जियों की व्यावसायिक खेती शुरू की।
बदलाव का सुखद परिणाम: आय पहुँची ₹1 लाख प्रति बीघा तकनीक, उन्नत बीज और सही प्रबंधन का परिणाम यह रहा कि प्रेमलाल जी द्वारा की जा रही खेती में पैदावार और आय में अप्रत्याशित बढ़ोतरी हुई। आज वे सही मार्गदर्शन के बल पर एक बीघा ज़मीन से लगभग ₹1 लाख तक की शुद्ध आय अर्जित कर रहे हैं।
इस बदलाव ने न केवल उनकी आर्थिक तंगी दूर की, बल्कि इस सफलता से वे और उनका परिवार अत्यंत खुश और संतुष्ट हैं। उप संचालक कृषि ने फार्म का किया भ्रमण, जैविक खेती का दिया संदेश उप संचालक कृषि श्री मुनेश कुमार शाक्य, एसएडीओ श्री फूलसिंह हिंडोरिया एवं एईओ श्री रवि अहिरवार (करेरा) ने सहरिया पहुँचकर किसान प्रेमलाल प्रजापति के कृषि फार्म का प्रत्यक्ष अवलोकन किया।
निरीक्षण के दौरान उप संचालक कृषि श्री शाक्य ने प्रेमलाल जी को रसायन-मुक्त जैविक एवं प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने खेत पर ही बीजामृत, जीवामृत और गोबर की जैविक खाद तैयार करने की विधियों की बारीकियों को समझाया। साथ ही फसलों को नुकसान पहुँचाने वाले कीटों से बचाव के लिए प्राकृतिक कीट प्रबंधन के उपाय भी बताए।
अधिकारियों ने रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के बिना समझ अनावश्यक प्रयोग को घटाने पर ज़ोर दिया, ताकि मानव स्वास्थ्य सुरक्षित रहे और पर्यावरण का संरक्षण भी हो सके। कृषि विभाग के सतत मार्गदर्शन और कृषक प्रेमलाल प्रजापति के अथक परिश्रम की यह सफलता की कहानी क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन रही है।
