बुरहानपुर/29 सितम्बर, 2026/- बुरहानपुर जिले के सिलमपुरा निवासी श्री किशोर पटेल के लिए पशुपालन पहले परिवार की आय का एक सामान्य साधन था। सीमित संसाधनों की वजह से पशुपालन कार्य से अपेक्षित आर्थिक लाभ नहीं हो रहा था। खेती-बाड़ी के साथ पशुपालन करने वाले किशोर अपनी आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करना चाहते थे। ऐसे में मुख्यमंत्री डेयरी प्लस योजना उनके लिए नई उम्मीद लेकर आई।

योजना का लाभ मिलने के बाद पशुपालन उनके लिए केवल आजीविका का साधन नहीं रहा, बल्कि आय बढ़ाने और आत्मनिर्भर बनने का माध्यम भी बन गया। योजना की जानकारी मिली, बढ़ा आत्मनिर्भरता का विश्वासकिशोर पटेल कहते है कि पशुपालन विभाग के अधिकारियों तथा सहायक पशु चिकित्सकों द्वारा इस योजना के बारे में पूरी जानकारी दी गयी। यह जानकारी किशोर को लाभकारी लगी और किशोर ने योजना की निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आवेदन किया।

खास बातें

  • बुरहानपुर/29 सितम्बर, 2026/- बुरहानपुर जिले के सिलमपुरा निवासी श्री किशोर पटेल के लिए पशुपालन पहले परिवार की आय का एक सामान्य साधन था।
  • मुख्यमंत्री डेयरी प्लस योजना के तहत इकाई लागत 2 लाख 95 हजार रुपये है।
  • वर्तमान में वे प्रतिदिन लगभग 18 से 20 लीटर दूध का उत्पादन कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री डेयरी प्लस योजना के तहत इकाई लागत 2 लाख 95 हजार रुपये है। जिसमें श्रेणी अनुसार शासकीय अनुदान एवं हितग्राही अंशदान निर्धारित है। हरियाणा के करनाल से मिली उन्नत नस्ल की भैंसेंआवेदन के बाद किशोर पटेल का चयन योजना के लिए हुआ। योजना अनुसार किशोर ने हरियाणा के करनाल से मुर्रा नस्ल की दुधारू भैंसों का चयन किया।

इस संपूर्ण व्यवस्था के दौरान हुए व्यय का वहन शासन द्वारा किया गया। लाभार्थी किशोर पटेल के पशुपालन व्यवसाय में उल्लेखनीय बदलाव आया। वर्तमान में वे प्रतिदिन लगभग 18 से 20 लीटर दूध का उत्पादन कर रहे हैं। इससे उन्हें प्रतिमाह अच्छा मुनाफा प्राप्त हो रहा है। दूध उत्पादन में वृद्धि के साथ पशुपालन के प्रति उनका उत्साह भी बढ़ा है।

नियमित आय मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है और अब वे पशुपालन को आगे बढ़ाने की दिशा में आत्मविश्वास के साथ कदम बढ़ा रहे हैं। पशुपालकों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सहयोगी है यह योजनामुख्यमंत्री डेयरी प्लस योजना के माध्यम से छोटे पशुपालकों को उन्नत नस्ल के दुधारू पशु उपलब्ध कराकर उनकी आय बढ़ाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में पहल की जा रही है।

वित्तीय वर्ष 2025-26 में जिले को 35 हितग्राहियों का लक्ष्य दिया गया था। योजना के अंतर्गत जिले के विभिन्न हितग्राहियों को मुर्रा नस्ल की 70 भैंसें (प्रति हितग्राही 2 भैंसें) प्रदाय की जा चुकी है।