मध्य प्रदेश शासन द्वारा हाल ही में घोषित कागपुर पक्षी कंजर्वेशन रिजर्व, विदिशा में पक्षियों की उपस्थिति एवं क्षेत्रीय जैव विविधता का आकलन करने के उद्देश्य से विशेष पक्षी सर्वेक्षण आयोजित किया गया। प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) श्रीमती समीता राजौरा के निर्देशानुसार वन विभाग एवं भोपाल बर्ड्स कंजर्वेशन सोसाइटी की संयुक्त टीम द्वारा सर्वेक्षण कार्य संपन्न किया गया।
सर्वेक्षण का संचालन वनमंडलाधिकारी ( DFO) विदिशा श्री हेमंत यादव के मार्गदर्शन में भोपाल बर्ड्स कंजर्वेशन सोसाइटी के अध्यक्ष मो. ख़ालिक, उप वनमण्डलाधिकारी विदिशा श्री रमेश गहलोत तथा वन विभाग के अमले द्वारा किया गया। टीम ने कागपुर के प्राकृतिक जलस्रोत तथा इसके आसपास के लैंडस्केप में पक्षियों की विभिन्न प्रजातियों की उपस्थिति का अवलोकन एवं दस्तावेजीकरण किया।
दुर्लभ यूरोपियन रोलर की उपस्थिति प्रमुख आकर्षण
सर्वेक्षण के दौरान कागपुर क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण देशी एवं प्रवासी पक्षियों को देखा गया। सर्वेक्षण का प्रमुख आकर्षण अत्यंत दुर्लभ प्रवासी पक्षी यूरोपियन रोलर ( European Roller) की उपस्थिति रही। इस पक्षी की मौजूदगी कागपुर क्षेत्र में उपलब्ध अनुकूल प्राकृतिक आवास एवं समृद्ध पारिस्थितिक तंत्र की महत्वपूर्ण विशेषता को दर्शाती है।
यूरोपियन रोलर के अलावा सर्वेक्षण में यूरेशियन कूट, स्पॉट-बिल्ड डक, व्हिस्लिंग टील, ओपन-बिल स्टॉर्क और वूली-नेक्ड स्टॉर्क जैसे प्रवासी पक्षियों की भी उपस्थिति दर्ज की गई। इन पक्षियों का क्षेत्र में दिखाई देना कागपुर जलस्रोत के महत्व को और अधिक रेखांकित करता है।
स्थानीय पक्षी प्रजातियों की भी समृद्ध उपस्थिति
प्रवासी पक्षियों के साथ-साथ कागपुर क्षेत्र में अनेक स्थानीय पक्षी प्रजातियां भी पाई गईं। इनमें ग्रीन बी-ईटर, स्पॉटेड आउलेट, स्केली-ब्रेस्टेड मुनिया, पाइड किंगफिशर, व्हाइट-थ्रोटेड किंगफिशर, कॉमन मैना और स्पॉटेड डव प्रमुख रूप से शामिल हैं।
स्थानीय एवं प्रवासी पक्षियों की इस विविधता से स्पष्ट होता है कि कागपुर क्षेत्र पक्षियों के लिए भोजन, जल एवं प्राकृतिक आवास की दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थल के रूप में विकसित हो रहा है।
53.5 हेक्टेयर में फैला है प्राचीन प्राकृतिक जलस्रोत
विदिशा तहसील के अंतर्गत 53.5 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैला कागपुर का प्राचीन जलस्रोत बेतवा एवं बाह्य नदियों के मध्य स्थित है। प्राकृतिक जलस्रोत और आसपास का भू-दृश्य देशी एवं प्रवासी पक्षियों को अनुकूल आवास उपलब्ध कराता है। यही कारण है कि यह क्षेत्र विभिन्न पक्षी प्रजातियों के लिए प्राकृतिक शरणस्थल के रूप में महत्वपूर्ण बनकर उभर रहा है।
कम वर्षा को देखते हुए जल उपलब्धता पर विशेष ध्यान
वर्तमान में कम वर्षा की स्थिति को देखते हुए वन विभाग द्वारा कागपुर क्षेत्र के जलाशयों में समीपस्थ जल स्रोतों से पानी भरने की व्यवस्था की जा रही है। इसका उद्देश्य जलाशयों में पर्याप्त जल उपलब्धता बनाए रखना है, ताकि आगामी शीतकाल में आने वाले प्रवासी पक्षियों को अनुकूल प्राकृतिक वातावरण उपलब्ध हो सके।
वन विभाग द्वारा जल उपलब्धता के साथ-साथ पक्षियों के प्राकृतिक आवास के संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
वैज्ञानिक प्रबंधन योजना और नियमित पक्षी निगरानी की तैयारी
आने वाले समय में भोपाल बर्ड्स कंजर्वेशन सोसाइटी, बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी ( BNHS) तथा पक्षी विशेषज्ञों के सहयोग से कागपुर पक्षी कंजर्वेशन रिजर्व के लिए वैज्ञानिक प्रबंधन योजना तैयार की जाएगी। इसके साथ ही नियमित पक्षी निगरानी तंत्र विकसित करने की दिशा में भी कार्य किया जाएगा।
इस पहल से कागपुर क्षेत्र में पक्षियों की प्रजातियों, उनकी संख्या, मौसमी आवागमन तथा आवास की स्थिति का नियमित वैज्ञानिक आकलन संभव होगा। इससे संरक्षण गतिविधियों को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।
जैव विविधता संरक्षण के साथ ईको-टूरिज्म को मिलेगा बढ़ावा
कागपुर पक्षी कंजर्वेशन रिजर्व में दर्ज देशी एवं प्रवासी पक्षियों की विविधता क्षेत्र के जैव विविधता संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। वैज्ञानिक प्रबंधन, नियमित निगरानी और जलस्रोतों के संरक्षण के माध्यम से इस क्षेत्र को भविष्य में प्रकृति एवं पक्षी पर्यटन (ईको-टूरिज्म) के संभावित स्थल के रूप में विकसित किया जा सकता है।
कागपुर में पक्षी सर्वेक्षण से प्राप्त जानकारी क्षेत्र की जैव विविधता के वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। वन विभाग एवं पक्षी विशेषज्ञों के समन्वित प्रयासों से आने वाले समय में कागपुर पक्षी कंजर्वेशन रिजर्व में संरक्षण गतिविधियों को और सुदृढ़ किए जाने की दिशा में कार्य किया जाएगा।

